"अनुराज "









"अनुराज "
                 एक कल्पना जिसका यथार्थ सब से  परे है ।एक ऐसा  शब्द जिसका अपना कोई पर्याय   नहीं है ।अनुराज जिसे केवल अनुराग कहे तो आश्चर्य नहीं होगा ।जीवन में क्या खोया क्या पाया इन सब से परे
 एक ऐसे उद्देश्य को साक्षीभूत करने की विधा जो गुरुसत्ता से हमें और आप सभी को एक जुट करने की प्रेरणा ही नहीं देता बल्कि एक ऐसी सत्ता को प्रमाणित भी करता है जहा जीवन के सारे विकार समाप्त हो कर गुरुत्व में समाहित हो जाते है ।अनुराज का अर्थ यही है ।जन्म से लेकर मृत्यु तक की धुरी नापने वाला हमारा श्वास एक ऐसी ऊर्जा है जो हमें इस संसार से जोड़े हुए है ।यदि यह श्वास की डोर बीच में ही टूट जाए तो हमारा जीवन समाप्त हो जाता है ।इस श्वास -प्रश्वास के खेल में हमने क्या पाया ?क्या खोया ?हम नहीं जान पाते ।ह्मारे जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक पूर्णता तक ही निहित नहीं है ।बल्कि इसी जीवन को जीते हुए आध्यात्मिक उत्थान भी आवश्यक है ताकि हमारे भूत -भविष्य -और वर्तमान जीवन का सही अर्थ बन पाये ,उद्धार भी हो सके ।अनुराज का अर्थ ही गुरुत्व है ।एक जीवन जीते हुये उन तमाम जन्मो का ज्ञान जो  हमें हमारे प्रारब्द्ध  से जोड़ता है साथ ही वर्तमान सुधारने की प्रेरणा भी देता है ।आप कौन हो ?क्या हो ये जानने के लिये आपके पास अपना नाम है ,जाति है ,समाज है और वो सभी लोग   जो आपकी उपलब्द्धियो में आपकी सराहना करते है और वो भी लोग है जो आपकी  प्रगति से ईर्ष्या रखते है ।पर  एक ऐसा कोई नहीं जो आप को इसी जीवन में आपके वर्तमान के साथ साथ आपके आने वाले कई जन्मो  को सुधार दे आपके जीवन में नई  उमंग और निर्भिकं जीवन प्रदान कर सके।,एक ऐसा कोई!  जो मृत्यु के बाद भी आपके साथ सूक्ष्म रूप में रह कर आपको मार्गदर्शन देता रहे ।
 "अनुराज " एक ऐसा ही माध्यम है ।जो अपने ज्ञान और चिंतन से मानव जीवन के कल्याण के
 लिए योग ,कुण्डलिनी शक्ति ,और त्रियामी शक्तियों को मानव जीवन में उतारने की प्रक्रिया को प्रेरित करता है ।
                                                                                         ………………अनुराज 

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